मुख्यमंत्री के इस आक्रामक रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति और अधिक गर्म होने वाली है
कोलकाता। सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर मामले में व्यक्तिगत रूप से पैरवी करने के ठीक अगले दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में अपने चिर-परिचित आक्रामक तेवर में नजर आईं। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने विपक्ष, विशेषकर भाजपा पर तीखा हमला बोला और दो टूक चेतावनी दी कि तृणमूल कांग्रेस न केवल कानूनी मोर्चे पर बल्कि चुनावी मैदान में भी जीत हासिल करेगी। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की ओर इशारा करते हुए आत्मविश्वास के साथ कहा कि विपक्ष आगामी चुनावों में कई सीटें हारेगा।
विधानसभा में अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने एसआईआर और घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र व राज्य के विपक्षी नेताओं को घेरते हुए सवाल किया कि आखिर बंगाल को ही बार-बार निशाना क्यों बनाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि आप लोग सिर्फ घुसपैठियों की बात करते हैं, लेकिन क्या नए मतदाताओं को वोट देने का अधिकार नहीं है? बंगाल हीरो था और हीरो ही रहेगा, जबकि आप लोग जीरो थे और जीरो ही रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों से लाए गए ऑब्जर्वर बंगाल की जनता को बुलडोज करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन राज्य की जनता एजेंसियों के डर के आगे नहीं झुकेगी। सीमा सुरक्षा बल को जमीन देने के विवाद पर भी मुख्यमंत्री ने सदन में स्थिति स्पष्ट की।
शुभेंदु अधिकारी द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार सुरक्षा व्यवस्था के लिए जमीन देने के खिलाफ नहीं है, लेकिन केंद्र को पहले बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर करने के मनमाने फैसले को वापस लेना होगा। उन्होंने कहा कि 15 किलोमीटर की सीमा तक जितनी जमीन चाहिए, उतनी दी जाएगी, लेकिन उससे अधिक क्षेत्र में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। विधानसभा के इस सत्र ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 2026 के रण के लिए राज्य में सियासी पारा अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। राज्यपाल द्वारा पूरा अभिभाषण न पढ़े जाने के मुद्दे पर ममता बनर्जी ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को अन्य कार्यक्रमों में जाना था, इसी कारण अभिभाषण पूरा नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं इसके लिए राज्यपाल को धन्यवाद देती हूं। इसके साथ ही उन्होंने नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी पर सवाल दागते हुए कहा कि बंगाल को बार-बार टारगेट क्यों किया जा रहा है? एक बंगाली होने के नाते आपने इसका विरोध क्यों नहीं किया? मुख्यमंत्री ने भाजपा पर संसदीय परंपराओं से भागने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठकों में शामिल ही नहीं होता और बाद में सदन में हंगामा करता है। ममता ने भाजपा से सीधे सवाल किया कि जब चर्चा से भागना है, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान कैसे होगा। अनुप्रवेशकारी मुद्दे पर ममता बनर्जी ने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि भाजपा इस विषय पर केवल झूठ फैलाती है और लोगों को गुमराह करती है। वोटर लिस्ट के मुद्दे पर ममता बनर्जी ने बड़ा राजनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने 2014, 2019 और 2024 के चुनाव पुराने मतदाता सूची के सहारे जीते हैं। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि चोर की मां जोर से बोले यही भाजपा की राजनीति है। इस बयान पर विपक्षी बेंच से जोरदार विरोध भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से सवाल करते हुए कहा कि बंगाल में अलग-अलग अग्निकांडों में कई लोगों की झुलसकर मौत हुई, लेकिन प्रधानमंत्री या केंद्र सरकार ने कभी किसी तरह की आर्थिक सहायता की घोषणा नहीं की। उन्होंने इसे केंद्र की संवेदनहीनता बताया।अपने भाषण के अंत में ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि बंगाल सरकार राज्य के हितों की रक्षा के लिए हर मंच पर लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि न तो दबाव की राजनीति चलेगी और न ही बंगाल के साथ किसी तरह का भेदभाव बर्दाश्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस आक्रामक रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति और अधिक गर्म होने वाली है।